
तारा माता की आरती का संपूर्ण हिंदी पाठ यहां पढ़ें।
आरती पाठ
जय तारा माता, जय तारा माता।
करुणामयी जगजननी, भक्तों की सुखदाता॥
जय तारा माता॥
ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की, तुम ही हो दाता।
अज्ञान रूपी अंधकार हर, जीवन जगमगाता॥
जय तारा माता॥
दीन दुखियों की रक्षा करती, संकट दूर भगाती।
जो श्रद्धा से ध्यान लगावे, उसकी लाज बचाती॥
जय तारा माता॥
महाविद्या स्वरूपिणी, महिमा अपरंपारी।
भक्तों के जीवन में भर दो, कृपा तुम्हारी॥
जय तारा माता॥
जो कोई आरती गावे, श्रद्धा प्रेम सहित।
तारा माता प्रसन्न हों, दें शुभ फल नित॥
जय तारा माता॥
॥ ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा ॥
