
श्री आदिनाथ चालीसा (Shri Adinath Chalisa) का संपूर्ण हिंदी पाठ यहां पढ़ें।
चालीसा पाठ
दोहा
शीश नवाकर आदिनाथ, करूँ विनय कर जोड़।
भवसागर से पार कर, काटो कर्म की डोर॥
अरिहंत, सिद्ध, आचार्य को, बारंबार प्रणाम।
उपाध्याय, साधु वंदना, सफल करें सब काम॥
चौपाई
जय आदिनाथ दयानिधि स्वामी।
जग के प्रथम जिनेश अनामी॥
ऋषभदेव प्रभु नाम तुम्हारा।
हरो सकल भवभय अंधियारा॥
नाभिराज के तुम सुत प्यारे।
माता मरुदेवी के दुलारे॥
प्रथम तीर्थंकर जग में आए।
धर्म सुधा सब जग बरसाए॥
असि, मसि, कृषि का ज्ञान दिया।
जीवन का कल्याण किया॥
शिल्प, विद्या, नीति सिखलाई।
sभ्यता की राह बतलाई॥
भरत-बाहुबली सुत तुम्हारे।
जिनके यश गाते संसारे॥
त्याग सभी वैभव अपनाया।
राजपाट सब छोड़ दिखाया॥
दीक्षा लेकर तप को धारा।
जग को सत्य मार्ग उजियारा॥
एक वर्ष तक आहार न पाया।
तपबल से जग को चकित बनाया॥
श्रेयांस कुमार ने पुण्य कमाया।
इक्षुरस का दान चढ़ाया॥
अक्षय तृतीया पुण्य महान।
याद करे सारा जहान॥
केवलज्ञान प्रभु ने पाया।
समवसरण दिव्य रचवाया॥
देव, मनुज, नाग सब आए।
प्रभु वाणी का लाभ उठाए॥
अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह धारा।
मोक्षमार्ग का दिया सहारा॥
राग-द्वेष सब दूर भगाया।
आत्मज्ञान का दीप जलाया॥
जो जन नित्य तुम्हें ध्यावै।
सुख-समृद्धि वह नित पावै॥
रोग, शोक सब दूर हो जावें।
मनवांछित फल सहज ही पावें॥
भक्ति करे जो श्रद्धा धारी।
कटें जन्म-मरण की बारी॥
आदिनाथ प्रभु कृपा तुम्हारी।
हो जीवन में मंगलकारी॥
दीन-duखी पर दया दिखाओ।
भवबंधन से मुक्त बनाओ॥
ज्ञान, दर्शन, चरित्र सुधारा।
मोक्षमार्ग का दो उजियारा॥
जय-जय आदिनाथ भगवान।
पूरण कर दो सब अरमान॥
दोहा
जो यह चालीसा नित पढ़े, श्रद्धा सहित मन लाय।
आदिनाथ प्रभु कृपा करें, मोक्ष मार्ग दिखलाय॥
॥ इति श्री आदिनाथ चालीसा सम्पूर्ण ॥
