
कार्तिकेय (मुरुगन/स्कन्द) जी की आरती का संपूर्ण हिंदी पाठ यहां पढ़ें।
आरती पाठ
जय कार्तिकेय देवा, स्वामी जय कार्तिकेय देवा।
शिव-पार्वती नंदन, तुमको नित सेवा॥
जय कार्तिकेय देवा…
मयूर वाहन शोभित, हाथ शक्ति धारे।
देव सेनापति बनकर, असुरों को मारे॥
जय कार्तिकेय देवा…
षडानन रूप मनोहर, तेज पुंज अपारा।
भक्तों के संकट हरते, करते भवपारा॥
जय कार्तिकेय देवा…
ज्ञान, शक्ति और साहस के, तुम हो दाता।
जो जन शरण में आए, उसका भाग्य जगाता॥
जय कार्तिकेय देवा…
दक्षिण भारत में पूजित, मुरुगन नाम तुम्हारा।
सकल मनोरथ पूर्ण करो, हे देव दुलारा॥
जय कार्तिकेय देवा…
जो कोई आरती गावे, श्रद्धा प्रेम सहित।
कार्तिकेय प्रसन्न हों, मिले शुभ फल नित॥
जय कार्तिकेय देवा, स्वामी जय कार्तिकेय देवा॥
॥ ॐ स्कन्दाय नमः ॥
॥ ॐ सरवनभवाय नमः ॥ 🙏🦚
