बुध देव जी की आरती (Budh Dev Ji Ki Aarti)

केतु देव जी की आरती (Ketu Dev Ji Ki Aarti) - Shubh Tokri

बुध देव जी की आरती का संपूर्ण हिंदी पाठ यहां पढ़ें।

आरती पाठ

जय बुध देवा, स्वामी जय बुध देवा।
संकट हरण हमारे, करहु कृपा सेवा॥ जय बुध देवा॥

पीताम्बर तन सोहे, कर में पुस्तक धारी।
विद्या-बुद्धि के दाता, तुम हो हितकारी॥ जय बुध देवा॥

सिंहासन पर विराजत, शोभा अपरम्पारा।
ज्ञान प्रकाश फैलाते, जग में उजियारा॥ जय बुध देवा॥

बुद्धि, विवेक प्रदान करो, हर लो अज्ञान।
तुम्हारी कृपा से मिलता, यश, वैभव, सम्मान॥ जय बुध देवा॥

जो जन श्रद्धा से नित, आरती गावे।
बुध देव कृपा करके, सुख-सम्पत्ति पावे॥ जय बुध देवा॥

॥ ॐ बुधाय नमः ॥ 🙏🟢

बृहस्पति देव जी

जय बृहस्पति देवा, स्वामी जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
जय बृहस्पति देवा…

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
जगत पिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
जय बृहस्पति देवा…

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
जय बृहस्पति देवा…

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
जय बृहस्पति देवा…

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर लो, भवसागर तारी॥
जय बृहस्पति देवा…

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाकर, संतों के प्यारे॥
जय बृहस्पति देवा…

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
कहे शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे॥
जय बृहस्पति देवा, स्वामी जय बृहस्पति देवा।
छिन-छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
जय बृहस्पति देवा…

॥ ॐ बृं बृहस्पतये नमः ॥ 🙏🟡

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