श्री बगलामुखी चालीसा (Shri Baglamukhi Chalisa)

श्री बगलामुखी चालीसा (Shri Baglamukhi Chalisa) - Shubh Tokri

श्री बगलामुखी चालीसा का संपूर्ण हिंदी पाठ यहां पढ़ें।

चालीसा पाठ

दोहा

नमो महाविद्येश्वरी, बगलामुखी हुंकार।

स्तंभनकारी जगत की, नमन करूँ बारम्बार॥

पीताम्बर धारी मती, सुंदर रूप अनूप।

मात कृपा अब कीजिये, मिटे जगत भव कूप॥

चौपाई

जय जय जय बगलामुखी माता। आदि शक्ति तुम जग की दाता॥ १ ॥

पीताम्बरा भवानी माई। तुमरी महिमा सब जग छाई॥ २ ॥

सौरभ वर्ण दिव्य सुकुमारी। दुष्टन के हित तुम हो भारी॥ ३ ॥

मस्तक मुकुट बिराजित नीका। पीत तिलक चमके वर टीका॥ ४ ॥

कंचन वसन बदन अति प्यारा। जाकी आभा अपरम्पारा॥ ५ ॥

एक हाथ जिह्वा चमकावे। दूजे हाथ गदा सोहावे॥ ६ ॥

शत्रु बुद्धि का स्तंभन करती। भक्तन के संकट सब हरती॥ ७ ॥

गंभीर नाद हुंकार तुम्हारी। काँपे सुर मुनि और नर नारी॥ ८ ॥

मदन देश की तुम हो वासी। घट-घट की तुम अन्तर्यामी॥ ९ ॥

ब्रह्मास्त्र विद्या कहलावे। जो सुमिरे सो संकट जावे॥ १० ॥

वाक स्तंभन की तुम हो दाता। तुम ही सबकी भाग्य विधाता॥ ११ ॥

वाद-विवाद माहिं जो ध्यावे। निश्चय ही वह विजय पावे॥ १२ ॥

राज-द्वार में संकट होई। नाम तिहारे छूटे सोई॥ १३ ॥

शत्रु सैन्य जब सम्मुख आवे। बगला नाम जपत भग जावे॥ १४ ॥

जो जन तुमरो ध्यान लगावै। सो नर सब सुख सम्पति पावै॥ १५ ॥

दरिद्रता सब दूरि भगावै। अमृत रस घर में बरसावै॥ १६ ॥

ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला। जब लगि जियौ दया फल पाला॥ १७ ॥

पीत प्रभा जग सुखद स्वरूपा। अगम अगोचर दिव्य अनूपा॥ १८ ॥

करहु कृपा माँ मो पर भारी। बिपति नसावहु विघ्न बिदारी॥ १९ ॥

नाथ सकल सुख भक्ति ही दीजै। संकट हरन दया अब कीजै॥ २० ॥

तुमरी महिमा को जग जानै। नारद शुक सब तुमको सरहानै॥ २१ ॥

विघ्न विनासन मङ्गलकारी। जय जय जय बगला सुखकारी॥ २२ ॥

जो यह पाठ करै चित लाई। ताकी बिपति सब दूरि जाई॥ २४ ॥

रामदास धरि ध्यान तिहारो। संकट में प्रभु तुमहिं संभारो॥ २४ ॥

करहु कृपा मातु कल्याना। दीजै मोहिं विद्या अरु ज्ञाना॥ २५ ॥

विघ्न हरन मङ्गल के दाता। तुम ही मेरे भाग्य विधाता॥ २६ ॥

जय जय जय बगलामुखी माता। पाठ समाप्त भयउ सुख दाता॥ २७ ॥

संतत सम्पति तुमरी दासी। पाप ताप सब दूरि बिलासी॥ २८ ॥

नित्य पाठ जो करैं तुम्हारा। सो जन पावै भव सों पारा॥ २९ ॥

प्रेम भक्ति सों जो जस गावै। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवै॥ ३० ॥

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताको छुटि जाई॥ ३१ ॥

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। सिद्ध न हो बिन कृपा तुम्हारी॥ ३२ ॥

आशा तृष्णा विपत सतावै। मोह मदादिक सब बिनसावै॥ ३३ ॥

शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौ इकचित तुम्हें भवानी॥ ३४ ॥

करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला॥ ३५ ॥

बगला चालीसा जो गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥ ३६ ॥

देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ ३७ ॥

जय जय जय जगदम्ब भवानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ ३८ ॥

सकल मनोरथ पूरण कीजै। दासन को वर अभय दीजै॥ ३९ ॥

ज्ञान प्रकाश करहु तुम माई। जय जय जय बगलामुखी सहाई॥ ४० ॥

दोहा

बगला चालीसा विमल यह, जो जन करैं विचार।

तिन्ह कहँ सब सुख सम्पति मिलै, उपजै बुद्धि अपार॥

सुंदर दास दास को जानि, कीजै मातु कल्यान।

संकट हरन मङ्गल करन, दीजै विजय का दान॥

॥ इति श्री बगलामुखी चालीसा समाप्त ॥

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